महाभारत से संबंधित भीष्म प्रतिज्ञा

हस्तिनापुर नरेश शांतनु एक बार शिकार करने गए, अचानक उन्हें कहीं से तो सुगंध आती महसूस हुई। उन्होंने पाया कि सुगंध एक सुंदर युवती से आ रही है उसका नाम सत्यवती था। शांतनु को सत्यवती से प्यार हो गया। उन्होंने सत्यवती के मछुआरे पिता से उससे विवाह करने की इच्छा जताई।

सत्यवती के पिता एक शर्त पर मान गए कि सत्यवती के बेटे को ही युवराज घोषित किया जाएगा।

शांतनु का एक बेटा पहले से था जिसका नाम देवव्रत था शांतनु मछुआरे की बात सुनकर उदास हो गए और लौट आए। जब देवव्रत ने अपने पिता को मायूस देखा तो वह मछुआरे के पास गया। देवव्रत ने उसे वचन दिया की सत्यवती का बेटा ही युवराज बनेगा। मछुआरे ने चतुराई दिखाते हुए कहां, “ लेकिन अगर तुम्हारे बेटे ने राज हथियाने की कोशिश की तो क्या होगा? मछुआरे को संतुष्ट करने के लिए देवव्रत ने वहीं पर आजीवन अविवाहित रहने की भीष्म प्रतिज्ञा कर ली। इसके बाद में सत्यवती को लेकर महल आ गए और शांतनु के साथ सत्यवती का विवाह हो गया। भीष्म प्रतिज्ञा करने के कारण देवव्रत भीष्म कहलाने लगे।

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