भगत सिंह

जन्म और परिवेश भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर 1907 को लायलपुर जिले के 1 गांव में (अब पाकिस्तान) में हुआ था | उनका पैतृक गांव खटकड़ कला है जो पंजाब भारत में है उनके पिता का नाम किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती था भगत सिंह का परिवार एक आर्य समाजी क्षेत्र परिवार … Read more

महाभारत से संबंधित भीष्म प्रतिज्ञा

हस्तिनापुर नरेश शांतनु एक बार शिकार करने गए, अचानक उन्हें कहीं से तो सुगंध आती महसूस हुई। उन्होंने पाया कि सुगंध एक सुंदर युवती से आ रही है उसका नाम सत्यवती था। शांतनु को सत्यवती से प्यार हो गया। उन्होंने सत्यवती के मछुआरे पिता से उससे विवाह करने की इच्छा जताई। सत्यवती के पिता एक … Read more

तेनाली रमन की कहानियां होली उत्सव और महामूर्ख की उपाधि

विजयनगर की होली आसपास के कई गांवों में काफी मशहूर थी। इस पर्व को यहां बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता था। खुद महाराज कृष्णदेव राय भी इस मौके पर होने वाले आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। इस दिन किसी एक निवासी को महामूर्ख की उपाधि से नवाजा जाता था। साथ ही दस हजार … Read more

तेनाली रमन की कहानियां अपराधी बकरी

हर दिन की तरह ही राजा कृष्णदेव राय अपने दरबार में बैठे हुए थे। तभी वहां एक चरवाहा अपनी फरियाद लेकर पहुंच गया। चरवाहे को देख राजा कृष्णदेव ने उसके दरबार में आने की वजह पूछी। तब चरवाहा बोला, ‘महाराज मेरे साथ बड़ा गलत हुआ है। मेरे घर के करीब में रहने वाले आदमी के … Read more

तेनाली रमन की कहानियां

भारत में ऐसे कई महान ज्ञानी हुए हैं, जिनकी बुद्धिमत्ता का लोहा हर किसी ने माना है। उनके व्यक्तित्व व चतुराई से जुड़े किस्से हर किसी को प्रभावित व रोमांचित करते हैं। भारत के इतिहास में ऐसे ही शख्स हुए हैं, जिनका नाम है तेनालीराम। तेनालीराम की बुद्धिमानी से भला कौन परिचित नहीं है। तेनालीराम … Read more

Vikram Aur Betaal | चार राजकुमार

बहुत पुरानी बात है, मिथिला में उदय दित्य नामक एक बुद्धिमान राजा थे वे अपनी प्रजा को बहुत प्रिय है उनकी प्रजा उन्हें उनकी दयालुता, समानता तथा न्याय प्रियता के लिए बहुत पसंद करती थी। राजा की रूपमंजरी नामक एक पुत्री थी, जो बहुत ही बुद्धिमान तथा सुंदर थी। रूप मंत्री को जो भी देखता … Read more

विक्रम-बैताल की कहानी: तांत्रिक की चाल

बहुत समय पहले की बात है, भारत में विक्रमादित्य नामक एक राजा थे। वे अपनी दयालुता और बुद्धिमानिता के लिए जाने जाते थे।उनकी बहादुरी की खूब चर्चा होती थी एक दिन राजा विक्रमादित्य के दरबार में एक तांत्रिक आया। उसने राजा को उपहार स्वरूप एक फल दिया। जिसे राजा ने सप्रेम स्वीकार किया। उस अनोखे … Read more

अकबर-बीरबल की कहानी: सबसे बड़ा हथियार

बादशाह अकबर कामकाज के अलावा भी कई चीजों के बारे में बीरबल से बातचीत किया करते थे। ऐसे ही बैठे-बैठे एक दिन बादशाह ने बीरबल से पूछा कि इस दुनिया में सबसे बड़ा हथियार तुम्हारे हिसाब से कौन-सा होता है?

इस बात के जवाब में बीरबल ने कहा कि संसार में आत्मविश्वास से बड़ा हथियार कुछ और नहीं हो सकता है। यह बात अकबर के समझ में नहीं आई, लेकिन फिर भी उन्होंने कुछ नहीं कहा। उनके मन में हुआ कि समय आने पर इस बात की परख की जाएगी

कुछ दिनों बाद राज्य में एक हाथी बेकाबू हो गया। पता करने पर समझ आया कि वो पागल हो गया है। उसे कर्मचारियों ने जंजीरों से जकड़ लिया था। इसकी खबर जैसे ही बादशाह को पहुंची, तो उन्होंने सीधे महावत से कहा कि जब भी तुम्हें बीरबल आता दिखे तो हाथी की जंजीरों को खेल देना
यह सुनकर महावत हैरान हो गया, लेकिन बादशाह का आदेश था, इसलिए सिर झुकाकर चला गया।

अब अकबर ने बीरबल को महावत के पास जाने के लिए कहा। महावत ने भी बादशाह के आदेश का पालन करते हुए बीरबल को आते देख हाथी को जंजीरों से मुक्त कर दिया। बीरबल को इस बात की खबर नहीं थी, इसलिए वो आराम से चल रहे थे। तभी उनकी नजर चिंघाड़ते हुए हाथी पर पड़ी। जैसे ही उन्होंने देखा कि हाथी उनकी ही तरफ आ रहा है। वो कुछ समझ नहीं पाए।

कुछ ही देर में उनके दिमाग में हुआ कि बादशाह ने मेरी आत्मविश्वास वाली बात को परखने के लिए ही इस हाथी को मेरे पीछे छोड़ने का आदेश दिया होगा। अब बीरबल इधर-उधर भागने की सोच रहे थे, लेकिन ऐसा कुछ हो नहीं पाया। सामने से हाथी आ रहा था और अगल-बगल में भागकर जाने की जगह नहीं थी।

इतने में हाथी बीरबल के काफी करीब पहुंच गया। तभी बीरबल ने सामने एक कुत्ते को देखा और उसे टांगों से पकड़कर हाथी की तरफ फेंक दिया। कुत्ते चीखते हुए हाथी से टकराया। उसकी ऐसी चीखें सुनकर हाथी वापस उल्टी दिशा में भागने लगा।

कुछ ही देर में इस बारे में बादशाह अकबर को पता चला, तब जाकर उन्होंने माना कि आत्मविश्वास ही मनुष्य का सबसे बड़ा हथियार है।

कहानी से सीख :

हर किसी की बात पर यूं ही भरोसा नहीं कर लेना चाहिए। बात की जांच और परख करना जरूरी है। दूसरी सीख यह है कि इंसान समय से पहले उम्मीद न छोड़े, तो परेशानी से बाहर निकला जा सकता है।

अकबर के दरबार के नवरत्न

भारत में अकबर मुग़ल सल्तनत के एक महान सम्राट थे | उन्होंने १५६०- १६०५ के दौरान भारत पर शासन किया | अकबर खुद तो पढ़े लिखे नहीं थे लेकिन कला के पारखी थे, इसलिए उन्होंने अपने दरबार में कई विद्वानों को नियुक्त किया था | इन विद्वानों में नौ विद्वान बहुत प्रसिद्द थे और वे … Read more

अकबर-बीरबल: हरे घोड़े की कहानी |

एक शाम राजा अकबर अपने प्रिय बीरबल के साथ अपने शाही बगीचे की सैर के लिए निकले। वह बगीचा बहुत ही शानदार था। चारों ओर हरियाली ही हरियाली थी और फूलों की भीनी भीनी खुशबू वातावरण को और भी खूबसूरत बना रही थी। ऐसे में राजा को जाने क्या सूझा कि उन्होंने बीरबल से कहा, … Read more